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आज के समाचारों में, पश्चिम अफ़्रीका का क्षेत्रीय संघ हाल की बाढ़ से उबरने में मदद करने हेतु घाना को धनराशि प्रदान करता है। अध्ययन में पाया गया कि विश्वभर में खनन से वनस्पति और जीव-जंतुओं की 12,000 से अधिक प्रजातियाँ प्रभावित हुई है, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने वस्त्र उद्योग के लिए पूर्णतः पुनर्चक्रण योग्य लचीला धागा बनाया, भारत स्वास्थ्य सहयोग तथा अन्य क्षेत्रों के वित्तपोषण द्वारा भूटान की विकास परिकल्पना का समर्थन करता है, 13 वर्षीय अमेरिकी छात्रा ने ताज़ी उपज से कीटनाशक हटाने की अनूठी विधि बनाई, फ़िनलैंड की वीगन खाद्य एवं पेय कंपनी ने वीगन पेय और योगर्ट की शृंखला बढ़ाई, और जापानी पशु-जन अस्पताल भूकंप-पीड़ितों तथा उनके प्रिय साथियों के लिए आश्रय बन गया। आज मेरे पास आपके लिए बागवानी का एक सुझाव है। उर्वरक पौधों की वृद्धि बढ़ा सकता है, पर इसकी अधिक मात्रा से जड़ें क्षतिग्रस्त और पत्तियाँ झुलस सकती हैं। हाल में उर्वरक डालने के बाद पत्तियों का पीला या भूरा होना, मुरझाना और लॉन पर धारियाँ पड़ना, इसकी अधिकता के संकेत हो सकते हैं। इससे बचने के लिए सुझाई गई मात्रा ही डालें, धीमे असर वाले उर्वरक या कम्पोस्ट का उपयोग करें, गीली पत्तियों पर उर्वरक न पड़ने दें और उर्वरक डालने के बाद पौधों को अच्छी तरह पानी दें। अत्यधिक शुष्क स्थिति में उर्वरक न डालें, क्योंकि मिट्टी में लवण सघन हो सकते हैं, और अतिरिक्त पोषक तत्त्व डालने से पहले मिट्टी की जाँच करें। यदि उर्वरक अधिक पड़ गया हो, तो संभव होने पर अतिरिक्त उर्वरक हाथ से हटाएँ, फिर मिट्टी में खूब पानी डालें ताकि अतिरिक्त लवण घुलकर बह जाएँ। थोड़ा उर्वरक पौधों को फलने-फूलने में मदद करता है, लेकिन अधिक मात्रा हमेशा बेहतर नहीं होती!











