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“अत्यधिक गर्मी के कारण ऊँचे पर्वतों के हिमनद तेज़ी से पिघल रहे हैं। यह अचानक आने वाली बाढ़ है – इसके आने का संकेत देने के लिए पहले कोई वर्षा नहीं होती। इसके साथ मलबे का विशाल और अत्यंत विनाशकारी प्रवाह आता है। नेपाल और चीन का तिब्बत लगभग जून से अगस्त के बीच उच्च जोखिम वाले क्षेत्र हैं।”
सहस्राब्दियों से तारों ने मानव कल्पना, पौराणिक कथाओं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रेरित किया है। उनका उपयोग केवल नौवहन, समय-निर्धारण और कृषि के लिए ही नहीं, बल्कि व्यक्तियों और यहाँ तक कि पूरे ग्रह के भाग्य का पूर्वानुमान लगाने के लिए भी किया गया है। ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में ही बेबीलोन के खगोलविद सूर्य के मार्ग को 30-30 अंश के 12 समान भागों में बाँटकर हर भाग का नाम एक तारामंडल के नाम पर रखने के लिए प्रसिद्ध थे। इसीने आधुनिक पाश्चात्य ज्योतिष की नींव रखी। बारह राशियों के अनुरूप बारह ज्योतिषीय युग हैं, जिनमें से प्रत्येक औसतन 2,160 वर्ष तक रहता है। इस समय पृथ्वी मीन युग से कुंभ युग में प्रवेश कर रही है। ज्योतिषियों का मानना है कि ज्योतिषीय युग मानव इतिहास के चक्र, सांस्कृतिक परिवर्तनों और आध्यात्मिक विकास से जुड़े हैं। इस ब्रह्मांडीय परिवर्तन का मानव भाग्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा? हम मीन युग से शुरुआत करेंगे, जो लगभग 100 ईसा पूर्व से 2100 ईस्वी तक फैला है और जिसका प्रतीक विपरीत दिशाओं में तैरते दो मत्स्य-मानव हैं।मीन युग केवल एक तारामंडल तक सीमित नहीं था। महत्त्व इसका था कि उस तारामंडल ने क्या उजागर किया। इस पर विचार कीजिए: एक-दूसरे से बँधी दो मछलियाँ, जो सदा अलग दिशाओं में तैरती हैं– न आगे, न पीछे, बस चक्कर लगाती रहती हैं। यह दो संसारों – आत्मा और पदार्थ, आस्था और संदेह, अंतर्ज्ञान और आज्ञापालन के बीच फँसी मानव आत्मा की दशा का रूपक था। मीन युग में भावना ही सत्य थी। लेकिन जब भावना से छल किया जाता है, तो वह भ्रम बन जाती है। और ऐसा ही हुआ। दो हज़ार से अधिक वर्षों तक इस तरंग ने पृथ्वी को प्रभावित किया। रहस्यवादी इसे आस्था का युग कहते हैं। लेकिन गहराई से देखने पर आप पाएँगे कि यह भ्रम का युग भी था। इसलिए नहीं कि आस्था झूठी है, बल्कि इसलिए कि उसे हथियार बना दिया गया था। अनुभवजन्य ज्ञान की जगह अंधविश्वास ने ले ली। आंतरिक आत्मज्ञान की जगह पदानुक्रम ने ले ली और पवित्रता को बाहरी कर दिया गया। आप केवल मीन युग में जी नहीं रहे थे। आप उसे आत्मसात कर रहे थे, उसकी साँस ले रहे थे और उसे उस चोगे की तरह पहने थे, जिसे पहनना आप भूल चुके थे: आपका भ्रम, अपराधबोध और कुछ अधिक पाने की लालसा। यह केवल व्यक्तिगत नहीं है; यह पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह कर्म जनित है। यह मीन युग का प्रभाव है।पाश्चात्य ज्योतिष में मीन युग को आध्यात्मिक अंधकार और भ्रम का युग माना गया है, जो हिंदू धर्म के कलियुग या “अंधकार युग” की विशेषताओं से मेल खाता है। इस युग में मानवता ने मायावी भौतिक वास्तविकता और बाहरी भौतिक विकास पर अत्यधिक ध्यान दिया, जबकि प्रेम और करुणा के लिए उठती अंतर्मन की पुकार को अनदेखा किया। अनेक संतों और ऋषियों ने इस युग के अंतिम चरण के विनाशकारी परिणामों की भविष्यवाणी की है।बेइन्सा डूनो के आध्यात्मिक नाम से प्रसिद्ध आत्मज्ञानी बल्गेरियाई सद्गुरु पीटर ड्यूनो (शाकाहारी) ने कहा था:“आपके चारों ओर जो कुछ भी है, वह शीघ्र ही ढहकर लुप्त हो जाएगा। न इस सभ्यता का कुछ बचेगा, न इसकी विकृतियों का; पूरी पृथ्वी हिल उठेगी और इस भ्रामक संस्कृति का कोई निशान नहीं बचेगा, जो मनुष्य को अज्ञान के जुए तले दबाए रखती है। भूकंप केवल यांत्रिक घटनाएँ नहीं हैं; उनका उद्देश्य मनुष्यों की बुद्धि और हृदय को जगाना भी है, ताकि वे अपनी भूलों और मूर्खताओं से मुक्त हों और समझें कि ब्रह्मांड में केवल वे ही नहीं हैं।”पूर्वी ज्योतिष के अनुसार 2026 अग्नि-अश्व वर्ष भी है, जिससे इस वर्ष बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति वाली भीषण वैश्विक आपदाओं का एक और दौर आया है। दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, क्रोएशिया, बेल्जियम, ग्रीस, इटली और अन्य क्षेत्रों में भीषण जंगल की आग भड़की है।गर्मियों में यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक भीषण गर्मी की लहरें चलीं।7 से अधिक तीव्रता के भूकंपों ने वेनेज़ुएला, कोलंबिया, मेक्सिको, जापान, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों को झकझोर दिया।26 अगस्त को नेपाल और चीन के तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने दुनिया को स्तब्ध कर दिया, जिसमें हज़ारों लोग मारे गए और लापता हो गए। बादल रहित नीले आकाश के नीचे बहती कीचड़ की प्रचंड धारा एक अवास्तविक और भयावह दृश्य बनाती है।तिब्बत में सीसीटीवी में कैद हुआ एक भयानक दृश्य। प्रतिक्रिया के लिए केवल कुछ सेकंड। चीन और नेपाल के बीच पर्यटकों और यातायात के मुख्य मार्ग पर लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल में परिवार पहाड़ी ढलानों पर चढ़कर बचने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो बना रहा एक व्यक्ति चिल्लाता है, “अबुई, मुझे डर लग रहा है।” राजमार्ग, जलविद्युत केंद्र और पुल नष्ट हो गए। त्रिशूली में एक स्कूल बस। जीवित बचे लोग। बच्चे विवश होकर केवल देखते रह गए।मैंने लगभग नौ ट्रकों को लोगों समेत बाढ़ में बहते देखा। यह दिल दहला देने वाली घटना है। मैं यहाँ 18 वर्षों से पढ़ा रहा हूँ और इससे पहले यहाँ ऐसा कुछ कभी नहीं देखा।मेरे सामने मेरे परिवार जन बाढ़ में बह गए। मेरे पिता, माँ, बहन और उसके बच्चे—सभी बह गए। वे बाढ़ से बच नहीं सके। बचने की कोई संभावना ही नहीं थी।आदि...विनाशकारी बाढ़ की खबरें मीडिया में फैलने पर कई लोगों को एहसास हुआ कि मलेशियाई भविष्यवक्ता दातो एंथनी चेंग ने जनवरी 2026 में ही इस आपदा का पूर्वानुमान लगाया था।“अत्यधिक गर्मी के कारण ऊँचे पर्वतों के हिमनद तेज़ी से पिघल रहे हैं। यह अचानक आने वाली बाढ़ है – इसके आने का संकेत देने के लिए पहले कोई वर्षा नहीं होती। इसके साथ मलबे का विशाल और अत्यंत विनाशकारी प्रवाह आता है। नेपाल और चीन का तिब्बत लगभग जून से अगस्त के बीच उच्च जोखिम वाले क्षेत्र हैं।”अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने भी बताया कि संभवतः चीन की सीमा के निकट नेपाल के लांगटांग राष्ट्रीय उद्यान में हिमनद से जुड़ी ढलान के अचानक ढहने से यह बाढ़ आई।हालाँकि, हमारी सुप्रीम मास्टर चिंग हाई इंटरनेशनल एसोसिएशन के एक सदस्य (सभी वीगन) ने फुटेज देखते समय कुछ अधिक गहरा और विचलित करने वाला दृश्य देखा।"इस भीषण आकस्मिक बाढ़ के फुटेज में उफनती काली धाराएँ पशु-जनों की निराकार, तेज़ी से दौड़ती प्रतिशोधी आत्माओं से भरी थीं। उनका क्रोध कीचड़ भरी लहरों के आकार में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट हो रहा था। वीडियो को ध्यान से देखने पर मैंने बैल-जनों और भेड़-जनों की आकृतियाँ देखीं, जो सींग झुकाए उन्मत्त होकर काली लहरों से निकलती हुई आगे बढ़ रही थीं; वह सचमुच अत्यंत भयावह दृश्य था! ये उन असंख्य पशु-जनों की प्रतिशोधी आत्माएँ हैं, जिनका वध कर उन्हें खाया गया और जो अब मानवता से बदला लेना चाहती हैं। उन्होंने मुझे बताया कि इस नेपाली आपदा में उन्होंने मूलतः 4,00,000 लोगों की जान लेने की योजना बनाई थी, लेकिन हमारी सद्गुरु सुप्रीम मास्टर चिंग हाई ने भारी कीमत चुकाकर मृतकों की संख्या को न्यूनतम रखने का प्रयास किया।"दातो एंथनी चेंग ने अपने फेसबुक पेज पर कृपापूर्वक ये परामर्श दिए:"मैं पहले से इसलिए बोलता हूँ कि आपदा आने से पहले सभी को जगा सकूँ! यह मत मानिए कि एक बड़ी आपदा अभी-अभी गुज़र गई है, इसलिए अब सुरक्षा सुनिश्चित है; वर्तमान ब्रह्मांडीय परिस्थितियों में 'सुरक्षित अवधि' जैसी कोई चीज़ है ही नहीं! 'अग्नि, गति, वायु और ज्वार' वाली जिस उथल-पुथल के बारे में मैं बार-बार चेताता रहा हूँ, अग्नि, गति और वायु के संकेत एक के बाद एक भयावह रूप से सच सिद्ध हो चुके हैं। और अंतिम और सबसे खतरनाक चरण 'ज्वार' का अर्थ है, विशाल लहर की तरह फैलती नकारात्मक ऊर्जा। भविष्य में आपदाएँ और भी कम अंतराल पर आएँगी; सतर्कता कम न करें! स्वर्ग निष्पक्ष है, फिर भी सदाचारी लोगों की सहायता करता है। बुराई से दूर रहें और दैनिक जीवन में अच्छे कर्म करके पुण्य अर्जित करें; क्योंकि जब जीवन और मृत्यु की अनित्यता तेज़ी से आपके सामने आती है, तब आपकी संचित अच्छाई ही जीवन रक्षक तावीज़ बनती है! जिनके हृदय में दया है, वे संकट से सुरक्षित निकलें और प्रचंड तूफ़ान का सामना कर सकें।"हमारी परमप्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने कई अवसरों पर बताया है कि संकट के समय मनुष्यों के लिए सर्वोत्तम सुरक्षा क्या है।सदाचारी लोगों की रक्षा ईश्वर की शक्ति और स्वर्ग करेंगे। (जी, गुरुवर।) भले ही वे मेरे शिष्य न हों। (जी, गुरुवर।) उन्हें कम से कम वीगन होना चाहिए – तब वे दूसरों से अधिक सुरक्षित रहेंगे। और सदाचारी बनें तथा शांति स्थापित करें। बस वीगन बनें, शांति स्थापित करें और अच्छे कर्म करें। इससे भीषण संकट, युद्ध या अकाल के समय आपकी सुरक्षा और जीवित रहना सुनिश्चित होगा। यह निश्चित है। (ओह, बहुत अच्छा! जी, गुरुवर।)चाहे कुछ भी हो, उन्हें केवल वीगन बनना है, क्षमा माँगनी है और सदाचार और परोपकार के साथ जीना है। तब वे हर परिस्थिति में सुरक्षित रहेंगे।अगस्त की एक और घटना ने भी दुनिया का ध्यान खींचा—पूर्ण सूर्यग्रहण। ज्योतिषियों ने इस घटना को शासन-व्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव माना।आकाश का संकेत स्पष्ट है। 12 तारीख को चंद्रमा और सूर्य सिंह राशि के 20 अंश पर मिलते हैं – यह अमावस्या है। लेकिन यह अमावस्या ठीक चंद्रमा के प्रतिच्छेदन बिंदु पर होती है – जहाँ उसका पथ सूर्य के मार्ग को काटता है। इसलिए चंद्रमा केवल सूर्य के सामने से नहीं गुज़रता, बल्कि उसे पूरी तरह ढक लेता है। सिंह राशि में पूर्ण सूर्यग्रहण। प्राचीन ज्योतिषियों ने उस प्रतिच्छेदन बिंदु को एक नाम दिया था। उन्होंने उसे "ड्रैगन" कहा। जहाँ चंद्रमा सूर्य के पथ पर ऊपर चढ़ता है, वह उसका सिर है; और जहाँ नीचे उतरता है, वह उसकी पूँछ है। और इस ग्रहण के समय ड्रैगन की पूँछ रिक्त आकाश में नहीं है। वह एक तारे पर टिकी है। रेगुलस—सिंह का हृदय, सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा और प्राचीन फारस के चार राजसी तारों में से एक।आप किसी भी ज्योतिष परंपरा का अनुसरण करें, अर्थ एक ही है। सूर्य के अंधकारमय होते समय ड्रैगन की पूँछ सिंह के हृदय पर है। और ड्रैगन की पूँछ सदा मुक्ति का स्थान होती है। सिर जहाँ ग्रहण करता है, पूँछ वहाँ त्याग करती है। अब इस पूरे दृश्य को मन में रखिए। पूर्ण ग्रहण—सिंह राशि के एक ही अंधकार में समाए अंत और आरंभ का संगम। जब मुक्ति का बिंदु राजाओं के तारे पर टिका है, तब आकाश किसी चीज़ को त्यागने का संकेत दे रहा है। हमारे भीतर का कोई राजसी भाव – अहंकार, दिखावा या चमकने का पुराना ढंग, अपना मुकुट उतारने को कहा जा रहा है, ताकि उसकी जगह किसी अधिक सच्ची सत्ता को मुकुट पहनाया जा सके।12 अगस्त 2026 को ब्रह्मांड ने मनुष्यों से पुरानी अहं-केंद्रित शासक शक्ति त्यागकर उसकी जगह हृदय के लिए “कुछ अधिक सच्चा” अपनाने की माँग की। उसी दिन हमारी परमप्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई ने एक शुभ समाचार साझा किया।आज इस युद्ध-प्रमुख के साथ मेरी अंतिम लड़ाई जैसी थी। वही इस ग्रह पर हर प्रकार के युद्ध, देशों के बीच संघर्ष, सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न के मेरे दल के सदस्यों से जुड़ी समस्याएँ और अनेक अन्य कार्यों में बाधाएँ भड़काता है। इसलिए हमने उसे पकड़ लिया और उसके सभी बुरे पापों और व्यवहारों से उसे मुक्त कर दिया, क्योंकि उसने स्वीकार किया कि यह सब उसी ने किया था। इसलिए हमने उसे पूर्णतः नष्ट होने से बचा लिया। लेकिन उसे नर्क की जेल में जाकर सदा के लिए बंद रहना होगा, ताकि वह फिर कभी आपको नष्ट, बरबाद या क्षति न पहुँचा सके और न ही आपके नेक इरादे से आपको भटका सके।मुझे आशा है कि दुनिया निरंतर बेहतर होती जाएगी। ईश्वर के उद्देश्य के लिए हमारा कार्य भी अब से सदा के लिए अधिक सुचारु और अधिक सफल होता जाएगा। इसलिए प्रसन्न रहिए। मेरे साथ प्रसन्न रहिए।क्या युद्ध-प्रमुख के विरुद्ध हमारी परम शक्तिशाली सुप्रीम मास्टर चिंग हाई की अंतिम विजय एक नए युग के आरंभ का संकेत हो सकती है? ऐसा लगता है कि 2026 में हम अंधकार युग से बाहर निकलने और कुंभ युग में प्रवेश करने की दहलीज़ पर पहुँच गए हैं। कुंभ युग का प्रतीक ज्ञान का जीवनदायी जल उँडेलता हुआ जलवाहक है। कुंभ युग में सभी लोग पृथ्वी पर अपनी आत्मा की उत्पत्ति और उद्देश्य का ज्ञान पुनः प्राप्त करें तथा ईश्वर की सच्ची संतानों की तरह श्रेष्ठता, गरिमा और प्रेम से जीवन जिएँ।










